पाकिस्तान के इतिहास और उसके समक्ष उपस्थित चुनौतियों के देखते हुए इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि शाहबाज़ शरीफ की सरकार भी शायद ही अपना निर्धारित कार्यकाल पूर्ण कर सके|
उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 62(1)(f) की पुनर्व्याख्या ने नवाज़ शरीफ के चुनाव लड़ने और सार्वजानिक पदों पर आसीन होने के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा को हटा दिया है| सुरक्षा अधिष्ठानों के परोक्ष समर्थन के कारण उनकी सत्ता में वापसी की संभावनाएं बलवती हैं|
पाकिस्तान में इस्लामी चरमपंथ को मिल रहे उच्चस्तरीय राजनीतिक एवं सैन्य संरक्षण के कारण अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं और उन्हें उनके ही देश में द्वितीय श्रेणी के नागरिक का जीवन जीना पड़ रहा है|
रूस-यूक्रेन युद्ध इस बात का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है कि कैसे सोशल मीडिया की सामग्रियों के माध्यम से, वैचारिक मूल्यों में छेड़छाड़ की कोशिश की जाती है।